प्यारे बच्चों ,
तुम गर्मी की छुटी में नानाजी के घर जाते होना ? क्या आजकल नहीं जापाते हो ,ओह क्यूँ ?अच्छा समर कोर्स चलते हेंकोई बात नहीं ,हम यहीं से नानाजी के आँगन में रोज चलेगें एक नयी कहानी सुनने
ये वो कहानियां है ये आँगन तुम्हारे लिए खुला हे,जब तुम चाहो इसमे खेल सकते हो , कहानी कविता, चुटकुले
पहेलियों का मजा ले सकते हो , नानाजी के आँगन में कोई डर नहींकल हम नानाजी के आँगन में पहली बार एक साथं चलेगें और आँगन के बारे में विस्तार से जानेगें । मल्टीस्टोरी वाले घरों के आँगन गम हो गए हे ,जब में एक बार मुंबई गई तो आँगन तो दिखा ही नहीं .और एक बच्चे ने कहानी सुनकर मुझसे प्रश्न किया दीदी ये आँगन
क्या होता हे?तो आगे सुनो कहानी आँगन की=-------------- फिर आँगन में लगे नीम के पेड़ की -----फिर चूहे मियां की खूब कहानी ---------ये आँगन और इसकी कहानी तुम्हे केसी लगी ये जरुर बताना , ओके
चलो कल मिलेगें नानाजी के आँगन में बाय बाय ----बाय तुम्हारी दीदी स्वाति
ज
Thursday, January 28, 2010
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